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रेणुका की शादी हो गई और वह ससुराल आ गयी वहाँ भी उसे किशोर की बहुत याद आ रही थी। इधर किशोर का भी हाल बेहाल था उसे तो कोई सम्हालने वाला भी नहीं था पल पल सोचता रहता कि रेणुका से मेरी शादी क्यो नही हुई। अक्सर जब हमारा बुरा वक्त चलता रहता है तब हमसे कुछ गलतियां हो जाती है वही किशोर के साथ भी हो गयी। माँ की तबियत फिर से बिगड़ने लगी थी उसने श्रेया दीदी को फ़ोन किया और दोनों माँ को लेकर शहर के बड़े अस्पताल चले गए। डॉक्टर ने किशोर की माँ को देखा उन्हें लग रहा था कि ये किसी बहुत बड़ी बीमारी की शिकार हैं। डॉक्टरों ने मीटिंग बुलाई और फौरन ही ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। ऑपरेशन तो उनका किया ही पर वो बच नहीं पाई। उनके शरीर का अंतिम संस्कार किया गया सब बहुत दुःखी थे पर कर भी क्या सकते थे।
लगभग १०-१५ दिन हो गए थे माताजी के संस्कार को सब अपने अपने घर चले गए। किशोर के पिताजी बचपन में ही चल बसे थे तब से उसके पिता और माता दोनों उसकी माँ ही थी और वो भी चल बसी तब उसे कोई सम्हालने वाला भी नहीं था। श्रेया दीदी भी चली गई अपने गाँव। अकेलापन किशोर को काटना मुश्किल सा था। इसी अकेलापन में उससे एक गलती हो गई। घर के पास की एक लड़की थी वह किशोर से बचपन से ही बहुत प्यार करती थी हालाँकि किशोर ने कभी उसपर ध्यान नहीं दिया था और उसे तो पता भी नहीं था। एक दिन वो लड़की किशोर के पास आई और अपने प्यार का इज़हार किया। किशोर ने उससे कहा मैं किसी और से प्यार करता था और उससे मैं शादी भी करना चाहता था तो मैं तुम्हे कभी अपना पहला प्यार नहीं बनाऊँगा। लड़की किशोर से बहुत प्यार करती थी और उसे उसका अकेलापन भी नहीं देखा जा रहा था तो उसने हामी भर दी कह दिया कि मुझे कोई एतराज नहीं है। मैं तुम्हारा दूसरा प्यार ही बन कर रह लूँगी।
किशोर वापस हिमाचल आ गया अपना ड्यूटी शुरू किया वहीं से वह कुसुम से बातें करता लेकिन वह रेणुका को नहीं भुला पा रहा था। इधर रेणुका के शादी को भी ३-४ महीने हो गए पर वो इतने दिनों में मुस्करायी भी नहीं। एक दिन उसके पति ने पूछा कि तुम हर वक्त हमेशा उदास रहती हो इसका कारण क्या है तो उसने अपने पति को सारी कहानी बता दी उसके पति बहुत अच्छे आदमी थे उन्होंने पूछा तुमने मुझसे पहले क्यो नहीं कहा कि तुम किसी और से प्यार करती हो मुझे पता रहता तो मैं पहले तुम्हे उसके पास पहुँचा आता। तुम आज ५ महीने बाद कह रही हो एक तो तुम उदास हो और वो भी तो बेहाल ही होगा।
रेणुका के पति ने किशोर से बात की और पूछा कि किशोर गाँव कब आ रहे हो जवाब मिला कि १० दिन बाद नये साल की छुट्टी में।तो उसने ही एक युक्ति निकाली कि आओ हम कहीं मिलते हैं और वहां आराम से बात करेंगे। दोनों की बातचीत हो गई दोनों मिलने को तैयार हो गए। किशोर सोच रहा था कि कहीं इसे मेरे और रेणुका के प्यार के बारे में पता तो नहीं चल गया इसीलिए बिना कुछ कहे मिलने को कह रहा है कहीं यह बदला लेने की तो नहीं सोच रहा है।
३० दिसंबर, साल के अंतिम दिन से एक दिन पहले फिर उन दोनों की बात हुई कि परसों हम अपने-अपने घर चले जाएँगे तो कल हम वाराणसी में ही मिलेंगें किशोर तैयार हो गया वाराणसी में मिलने के लिए। किशोर के मन में तरह-तरह की बातें उठ रही थी कि ये मुझे अकेले बुला रहा है तो या तो ये मेरे और रेणुका के बीच जो कुछ भी था उसको लेकर कुछ जानकारी चाहता होगा या फिर मैं जो रेणुका से बेइंतेहा प्यार करता था और हमारी शादी नहीं हुई उसे लेकर यह मुझे चिढ़ाएगा कि हमारा प्यार सच्चा नहीं था जो हमारी शादी नहीं हो सकी। तो कहीं ये रेणुका को साथ में लाए और मेरे और रेणुका के ऊपर तरह-तरह के कटाक्ष करे, ऐसे ही तरह-तरह के ख्याल किशोर को आ रहे थे। तो उसने कुसुम को फोन किया और कहा कि तुम कल वाराणसी आ जाओ मैं घर आ रहा हूँ। तुम मुझे लेने आ जाओ कल,कुसुम आने को तैयार हो गई पर किशोर ने उसे ये नहीं बताया कि वहाँ पर वो लोग भी आ रहे हैं।
रेणुका ने अपने पति से पूछा कि आप कहाँ जा रहे हैं तो उसने हँसकर जवाब दिया कि मैं नहीं, हम जा रहे हैं।रेणुका ने कहा पर कहाँ तो उसने कहा कि वाराणसी। फिर रेणुका ने पूछा क्यों तो उसने बताया कि यह एक सरप्राइज है। फिर दोनों तैयार हो वाराणसी के लिए रवाना हो गए। इधर किशोर हिमाचल से और कुसुम अपने घर से वाराणसी के लिए चले।
अगले सुबह सबसे पहले रेणुका और उसके पति वाराणसी पहुँचे। वे दोनों पास ही के होटल में जाकर रूके। थोड़ी देर बाद किशोर के आने का समय हो चला तो उसने रेणुका से कहा तुम यहीं रूको मैं तुम्हारा सरप्राइज लेकर आता हूँ रेणुका ने कहा ठीक है तो वो वहाँ से स्टेशन की ओर चल पड़ा।
कुछ देर बाद वहाँ किशोर स्टेशन पहुँचा और ट्रेन से उतर वह रेणुका के पति के साथ होटल की तरफ चल पड़ा। रास्ते में उसे पता चला कि होटल में मेरे लिए एक सरप्राइज है वह खुश हो गया। कुछ समय बाद दोनों होटल के पास आए तब उसने किशोर से कहा कि तुम यहाँ बाहर ही रुको मैं आता हूँ। किशोर वहीं सड़क के दूसरी ओर खड़ा रहा और वो होटल के अंदर गया और कुछ देर बाद एक महिला के साथ बाहर निकला किशोर जहाँ खड़ा था वहाँ से वो महिला साफ-साफ नहीं दिख रही थी कि वह कौन है।
कुछ समय बाद जब रेणुका और उसके पति होटल के बाहर निकल कर आये तब वे दोनों किशोर को बिल्कुल साफ दिखाई देने लगे। किशोर ने बहुत दिनों के बाद रेणुका को देखा था तो दोनों एक-दूसरे को बस देखे जा रहे थे। वे सब कुछ भूल चुके थे, यह भी भूल गए थे कि रेणुका की शादी हो गई थी बस एक-दूसरे को देखे जा रहे थे। फिर अचानक दोनों का ध्यान एक-दूसरे से हटा तो रेणुका अपने पति के तरफ देखने लगी। उसने रेणुका से कहा कि तुम देख क्या रही हो जाओ किशोर के पास आज से तुम मेरी नहीं किशोर की ही अमानत हो, अगर मुझसे कोई गलती हो गई हो तो मुझे माफ कर देना। इतना कहते हीं तीनों के आँखों में आँसू आ गए। रेणुका, किशोर की तरफ ऐसे दौड़ी कि जैसे कोई छोटा सा बच्चा किसी मनपसंद खिलौने के लिए दौड़ता है दोनों ने एक-दूसरे को गले लगा लिया और खुशी से जोर-जोर से रोने लगे। तभी उस सड़क पर न जाने कहाँ से एक तेज रफ्तार से गाड़ी आई और उन दोनों को टक्कर मारती चली गई। लोगों ने उसका पीछा करना शुरू तो किया पर वो भाग खड़ा हुआ।
रेणुका और किशोर दोनों एक-दूसरे के बाँहों में बिना किसी देरी के स्वर्ग सिधार गए। सच्चे प्रेमी को भगवान ने मिलवा दिया, दोनों यदि जीवित रहते तो शायद पूरी दुनिया का ताना-बाना सुनना पड़ता पर भगवान ने उन्हें निश्चिंत कर दिया। रेणुका के पति वहाँ जोर-जोर से चित्कारते रहे और अपने ऊपर पचताते रहे कि बेकार हीं मैंने ये योजना बनाई मैं यदि ये योजना न बनाता तो शायद दोनों एक-दूसरे से दूर हीं सही पर जीवित होते। लोगों का कहना था कि इसमें आपकी कोई गलती नहीं भगवान को शायद यही मंजूर था।
लोगों के नजरिए में उनका प्यार अधूरा ही था पर उनका प्यार पूरा हो चुका था हाँ लेकिन उनके प्यार का एक हैप्पी ऐंडिंग नहीं हो सका। उन्होंने तो पूरी जिंदगी प्यार का इंतजार हीं किया था इसी के लिए कितने ही दुखों को झेला, पर फिर से वही गौतम बुद्ध की बात याद आ गई कि इस दुनिया में सुखी कौन है?
-रंजन कश्यप
नोट-इस कहानी का किसी भी वास्तविक जीवन से कोई सम्बन्ध नहीं है यह सब महज़ एक कल्पना पर आधारित है। किसी भी वास्तविक जीवन से संबंध एक संयोगमात्र है।
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Bahut sandaar raha maine dono kiston ko padha pahle to mujhe laga ki utna acha ending nahi hai to bakwas type hoga lekin pura padhne ke bad main100% galat ho gya agar title ko dekha jai to isse badhiya ending nahi ho sakti thi.
ReplyDeletesandaar
jabardast
jindabad.
आखिर में अच्छा तो लगा न बहुत-बहुत धन्यवाद।
Deleteधन्यवाद जी।
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